परसाई जी का भूत

भगवान की दया से मेरा एक मित्र है। बड़ा श्रद्धालु व्यक्ति है। भगवान की ही दया से मैं बिल्कुल श्रद्धालु नहीं हूं। ये अक्सर शाम को मेरे कमरे में आजाता है और दार्शनिक बातों का पिटारा खोल देता है। इसे लगता है कि अगर इसने मुझे एक दिन हिंदू बना दिया, तो बाकियों को आसानी से बना देगा। इसके अनुसार मैं इतना नीच किस्म का नास्तिक हूं कि सारा संसार मुझसे बेहतर है।

आज आया, तो बोलता है "मेरा स्टेटस देखा?" हां भाई देखा, लेकिन मैं इसे नहीं बोलूंगा। मुझे भी चूल है।

"नहीं यार, टाइम नहीं मिला।"

"अरे तो अभी देख, और बता कैसा है?"

"हां जी।" मकतापना अपनी चरम सीमाओं पर पहुंच रहा है। मनुष्य पहले पैसा मांगता था, खाना मांगता था, अब पुष्टि मांग रहा है।

स्टेटस ऐसा है कि एक फॉरेनर लड़की माथे पर टीका लगाए हुए बोल रही है, "हिन्दुस्म इज नोट अ रिलीज़न, इट्स अ वे ऑफ लाइफ!" उसके बाद तीन चार मंदिरों और आरतियों की तस्वीरें आये जा रही और गंभीर आवाज में सुनाई पड़ता है, "इसलिए ही तो हमें सनातन धर्म कहा गया है! (पौराणिक संगीत के साथ)"

यह पश्चिमी संस्कृति के लोग भी अजीब है। जब हिंदू धर्म के बारे में जानने लगते है, तो कहते है, "हिन्दुस्म इज नोट अ रिलीज़न, इट्स अ वे ऑफ लाइफ!"

मतलब अगर इन लोगों को गंगा के दर्शन करा दो तो कहेंगे, "गंगा इज नोट अ रिवर, इट्स अ फ्लो ऑफ वॉटर!"

और अद्भुत बात तो यह है कि यह सुनकर हमारे धर्म का महाज्ञानी इसे स्टेटस पर लगाएगा और कहेगा कि हमारे धर्म में तो यह बात भी पहले ही कहदी थी, हम हिंदू नहीं सनातन धर्म है।

मुझे एक बात तो समझ आ गई। यह सारे धर्म वास्तव में रेस लगा रहे है। यहाँ ये मापा जा रहा कि किसने कौनसी बात पहले कही थी। मेरे मित्र ने इस रेस में सट्टा हिंदू धर्म पर लगा रखा है। इसलिए अभी भी बड़ा आतुर है कि मैं नीच इससे स्टेटस देखकर क्या कहूंगा,

"कैसा लगा? कुछ समझ आया?"

बोल ऐसे रहा जैसे ऋग्वेद के श्लोक सुना दिये हो।

"नहीं, नहीं समझ आया। मगर वह लड़की कौन थी?" कहां ना मुझे भी चुल है।

"अरे ठरकी, धर्म के मामले में यह सब नहीं सोचते!"

मैं थोड़ी देर चुप रहा। फिर वही बोला, "उसकी इंस्टा आईं. डी. मिली मुझे वैसे। फ्रांस की है!"

"अच्छा?"

"हां, मैंने डीएम करा है। क्या पता रिप्लाई करदें।"

हाय! पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।

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